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Saturday, 15 June 2013

प्रकाश

तू हाथ फैला फिर
उस प्रकाश को
पाने के लिए
जिसने अपने को जला
दूसरों को उजाले
परोसे हैं।
दिया है भरोसा
उस प्रकाश ने
जीवन में हौसला
जगाने के लिए।
हर सुबह उठता है
नई रौशनी लेकर
और दिन भर
बांटता फिरता है
और अस्‍ताचल को
खाली हाथ
लौट जाता है
फिर एक

नई सुबह के लिए।

1 comment:

  1. "आपकी डायरी के पन्ने" अच्छे लगे..।

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